श्रीराम श्रीपरशुराम सनातन सेवा फाउंडेशन
(कामधेनु गुरु गोरक्षनाथ भारतीय गौवंश सेवा, संरक्षण एवं संवर्धन मिशन)
मंगलनाथ (अरविन्द्र प्रताप सिंह) अध्यक्ष श्रीराम श्री परशुराम सनातन सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं, विगत 15 वर्षों से सनातन धर्म की सेवा में लगे हैं और भारतीय गौवंश और पंचगव्य पर रिसर्च कर रहे हैं। पेशे से Soft Engg. होने के बावजूद गौसेवा, एवं संवर्धन के कार्य में लगे हुए हैं और भारतीय समाज को पुनः जर्सीगाय H.F गाय से पुनः भारतीय गौवंश पालने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। विगत वर्षों के रिसर्च एवं अध्ययन करके एक छोटा सा अनुभव आप सबके सामने रख रहे हैं कुछ विशेषताएँ भारतीय गौवंश के बारे में,
01- सनातन धर्म में भारतीय गौवंश में सभी देवी देवताओं, सभी तीर्थों, सभी सप्त ऋषियों का स्थान बताया गया है। हमारे ऋषि मुनियों सिद्य संतो, आचार्यों ने गौवंश को देवी देवताओं से ऊपर सम्मान दिया। भारतीय गोवंश में सूर्य केतु नाड़ी होने के कारण इसका दूध अमृत तुल्य है जो कि कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारी को भी खत्म करता है। पंचगव्य (दूध, दही, घी, गौअर्क, गोवर) से जटिल से जटिल बीमारियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है।
(A) सनातन धर्म में भारतीय गौवंश को माता माता इसलिए कहते हैं कि वह वहमाण्ड की ऊर्जा व संरचना को संतुलित करती है। सनातन धर्म के वेदों में गौमाता को ब्रम्हा का वंश, विष्णुकी गति व शिव की शांति है।
(B) भारतीय गौवंश में सूर्य केतु नाड़ी होती है जो कि सूर्य की किरणों के खींचकर स्वर्ण ऊर्जा में बदल देती है।
(C) भारतीय गौवंश की आंख में तरण ब्राह्मण तरल है जो देवताओं और धरती के बीच सेतु है।
(D) भारतीय गौवंश की सांसे, त्वचा, गोवर, गौअर्क सब मिलकर एक ऊर्जा क्षेत्र बनाते हैं जिसको आज भी विज्ञान नहीं सुलझा पाया।
(E) भारतीय गौवंश के दूध में कैल्शियम के अलावा DNA Repair Agents होते है जोकि मानव शरीर के DNA को Repair करते है,
(F) भारतीय गौवंश में डार्क रेडिएशन अवशोषक जिसको नासा भी प्रमाणित कर चुका है।
(G) भारतीय गोवंश जब धरती पर बैठती है तो उसका शरीर इलेक्ट्रो चुंबकीय क्षेत्र डेवलपर करता है जो कि 7 मी० तक धरती को जैविकरूप से पुर्नजीवित कर देता है। यह एक चलती फिरती ऊर्जा आवृत्ति जनरेटर है इसके सांस छोड़ने पर एक तरह का अनुनाद जैव क्षेत्र बनता है जोकि मनुष्य को एक Therapy की तरह फायदे पहुंचाता है। जिसको USA भी अनुमत कर चुका है।
(H) भारतीय गौवंश की जिस जगह हत्या की जाती है उस क्षेत्र के 30 मी. के क्षेत्र में 5 साल तक विष्णु उत्पन्न हो जाते है व धरती विषैली हो जाती है। इसकी हत्या करने पर वहमाण्ड और धरती के बीच की ऊर्जा का संबंध खत्म हो जाता है।
(1) भारतीय गौवंश मंदिरो मे प्राचीन समय से रखे जाते है वह मंदिरो व मठो, ज्योतिलिगो, शक्तिपीठो मे नकारत्मक ऊर्जा को आने से रोकती है और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाती है और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढाती हैं और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को संतुलन करती है।
(१) भारतीय गौवंश मंदिरो, मठो, शक्तिपीठो, ज्योतिरलिगों मे नंदी भगवान, गौ माता ऊर्जा अवरोधक और ऊर्जा फ़िल्टर का कार्य करते है इसको वैज्ञानिक भी मानते है कि भारतीय गौवंश विद्युत चुंबकीय गड़बड़ी को सुधारने की क्षमता सबसे ज्यादा है जो कि अपनी ऊर्जा से उसको balance करते रहते हैं।
(K) भारतीय गौवंश के पंचगव्य (दूध, दही, घी, गीअर्क, गोवर) को जीवांत अम्तत कहा गया है –
दूध- A2 Milk है जो मनुष्य के DNA के साथ संगत हैं
दही- मनुष्य की आंतो में Good Bactaria को वहुत ज्यादा बढ़ाता है
घी- भारतीय गोवंश के धी मे व्यूटेरिक वंव होता है जो कि मस्तिष्क में Neurance को पुनर्जीवित करता है घी के हवन से वातावरण और मनुष्य की चेतना दोनों को शुद्ध करती
गौअर्क – भारतीय गौवंश के गौअर्क करती है। (गौ-मूत्र) मे 5 Important Anti Cancer Compound होते है Allms वनारस, पंतजलि और पश्चिम देशों के शोध संस्थानों ने इसे Bio-Enhancer माना है।
(L) भारतीय गौवंश के DNA में सूर्य केतु नाड़ी पायी जाती है जोकि सिर्फ भारतीय गौवंश में पायी जाती है नासा के Cosmic Life form Project मे भारतीय गौवंश DNA के cosmic code matching sequence
पाए जाते है ये पृथ्वी केनही वहमाण्डीय रचना के प्रतीक है।
(M) मंदिरों एवं शिवलिंग पर पंचगव्य से अभिषेक इसलिए किये जाते है ताकि देवी और देवताओ का गौशक्ति का मिलन होताहै शिवलिंग पर पंचगव्य से अभिओक करने पर कम्पन होता है जिससे ध्वनि पैदा होती है जोकि ॐ की ध्वनि है जोकि ब्रहमांड की तरंगो को नियन्त्रित करती है। शिव मंदिरों में नंदी व गाँमाता की मूर्ति होती है जो कि चेतून उजकिा वाहक है शास्त्रों में कहा गया है कि नंदी और गौमाता शिव ऊर्जा के स्थायी संचालक है। गौमाता की आत्मा नंदी तत्व से जुड़ी है इसलिए गौमाता को पालना आवश्यक है गौमाता पृथ्वी नहीं ब्रहमाण्ड की बेटी है।
(N) वेदों में कहा गया है कि ब्रह्मा ने जब सृष्टि की रचना की तब पंच भूतों (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी) को जोड़ा पृथ्वी पर सृष्टि तब तक स्थिर नहीं हुई जब तक ब्रह्मा ने प्राणशक्ति को एक रूप नहीं दिया वह रूप गीभाता का था।
(10) भारतीय गौवंश के गोबर को जलाने से Radiation sheild बन जाता है Nasa के Research में यह पाया गया कि गौमाता के गोबर पर सूर्य की किरण पड़ने से उससे Sub Atomic Protective layer बनाता है जो mobile phone और 5G के Radiation को 90% तक कम करता है। इसलिए सनातन धर्म को मानने वाले आज भी भारतीय गौवंश के गोबर का इस्तेमाल अपने घरों में करते हैं। गौमाता धरती पर एक चलती फिरती अजिस्रोत है।
(P) भारतीय तंत्र शास्त्र के, अनुसार, मानव शरीर में 7 चक्र होते है जब हम भारतीय गौवंश के पंचगव्य का इस्तेमाल करते हैं तो सभी चक्र Activate हो जाते हैं। गौमूत्र मूलाधार और स्वाधिष्ठान, दही, मणिपुर दूध अनाहूत, घी, विशुद्ध, गोबर सहस्माधार को Active और स्थिर करता है। विदेशी षड़यंत्र ने गोबर को मल, गोमूत्र को अशुध और दूध में फैट जैसे भ्रामक प्रचार किये ताकी अगर भारतीयों ने पंचगव्य को अपना लिया न तो उन्हें दवाईयों की जरूरत होगी और न ही Hospital की और Foreign Pharma Company का अरबो व खरबों का व्यापार का नुकसान होगा, उन्होंने ज्यादा दूध का लालच देकर जर्सी M.F. जैसी विदेशी गायो का semen व जानवर भेजकर हमारी संस्कृति का खत्म कर रहे हैं जर्सी, H.F जानवर जो दूध देते हैं वो Al Milk कहा गया है जोकि सूअर के दूध की तरह से है। इसका सेवन करने से आज भारत में भवन Diabetes , Thyroid, केलेस्ट्राल Brain shook जैसी बीमारियां प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
Q – भारतीय गौवंश के गौशाला में Bio Field Resonance वनता है वहां पर ध्यान लगाने से मन शांत हो जाता है जब कोई साधक गौशाला में ध्यान करता है तो उसका मन अल्फावेन अवस्था में चला जाता है। मस्तिष्क के बायें और दायें गोलार्ध संतुलित होते हैं। वहचर्य ऊर्जा स्थिर होती है। इसलिए महर्षि पतंजलि ने गौमाता के साथ रहकर ध्यान लगाने की सलाह दी।
(S) भारतीय गौवंश को भारतीय ज्योतिष में गौदृष्टी योग कहा गया है। जब गौमाता की आँखों में सूर्य और चन्द्रमा दोनों का प्रतिबिम्ब दिख जाए तो वह सिद्ध पीठ बन जाता है। गौमाता की आँखों में Reflective surface होता है जो अदृश्य तरंगों को पकड़ती है। गौमाता के साँस छोड़ने से वेव कम्पन AUM के समान होता है। इस ध्वनि की आवृत्ति 7.83 H+2 होती है। यह वही H+2 है जिस पर हमारी पृथ्वी काम कर रही है
(R) भारतीय गौवंश की “गिर” नस्ल पर कुछ शोध किये गये हैं। गिर नस्ल में कुछ ऐसे जीन पाये गये हैं जोकि गामा रेडिएशन को Absorb करते हैं और solar protein burst से सुरक्षित रखते हैं और DNA repair को ज्यादा तेज करते हैं।
(T) भारतीय गौवंश जहां बैठती है वहां 30 फीट के दायरे में wide Dart web zone बन जाता है जो उसकी शांति, करुणा और मातृत्व ऊर्जा को प्रसारित करता है। इसलिए अब old Age Home और Hospital में cowtheropy zone बनाये जा रहे हैं।
(U) सन् 2035 तक Scientists, Army, और संतो ने वताया है कि पूरे विश्व में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होने लगेगा। Rediation के प्रभाव को केवल दो चीजें रोक पाएगी, पहली तुलसी माता के पत्तों में आर्सोलिक एसिड और गौमाता में माजूद जीवित ऊर्जा प्लाज्मा
(V) भारतीय गौवंश को शास्त्रों में वर्णन इस प्रकार किया गया है कि ब्रह्मा ने उसे रचा, विष्णु ने उसकी पूजा की और शिव ने उसे योग व वाहन बनाया। गौमाता का माथा ब्रह्मा का श्रोत, आँखें विष्णु की, दृष्टीपुंज, शिव की उर्जा जोकि ब्रम्हाण्ड का सुरक्षा कवच है।
अतः आप सब सनातनी भाइयों व बहनों से विनम्र अनुरोध है कि प्रत्येक परिवार एक गौवंश जोकि भारतीय गौवंश है उसको अपने परिवार के सदस्य की तरह से सेवा करे उससे मिलने वाला पंचगव्य आप सब सनातनियों के परिवार को निरोगी, बलशाली बुद्धिमान, बनायेगा और शास्त्रों के अनुसार जिस घर में भारतीय गीवंश की सेवा होती है वहां पर सभी देवी देवता वास करते हैं और सुख समृद्धि का आर्शीवाद देते हैं।
आप सभी सनातनी भाईयो और बहनों को सादर प्रणाम,